श्रद्धालुओं के आस्था और धैर्य की परीक्षा लेगीं कुआँनो की काली लहरें और बदबू करता कूड़े का ढेर..

Basti ⏩Gyan Prakash Dubey

श्रद्धालुओं के आस्था से टकरा रही है कुआँनो की काली लहरें

बस्ती, 25 अक्टूबर 2025

छठ पर्व की रौनक पूरे जिले में दिखने लगी है, पर बस्ती के श्रद्धालुओं के लिए इस बार आस्था की डुबकी आसान नहीं दिख रही। अम्माहट घाट पर आज चित्रांश क्लब की ओर से कुआँनो नदी की भव्य गंगा आरती संपन्न हुई — दीपों की लौ, घंटों की गूंज और श्रद्धा का सैलाब चारों ओर था। लेकिन आरती की रोशनी के नीचे कुआँनो का काला और बदबूदार पानी प्रशासन की लापरवाही को साफ उजागर कर रहा है।

सोमवार और मंगलवार को छठ का मुख्य पर्व है, पर घाटों की हालत देखकर लगता है कि प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आस्था को किसी बड़ी परीक्षा में डाल दिया है। अम्माहट घाट और अहमद घाट के किनारे कूड़े-कचरे का ढेर, सड़ांध मारता पानी और गंदगी की परतें — मानो श्रद्धालुओं से कह रही हों, “पहले हमें पार करो, फिर छठ मनाओ!”

कुआँनो नदी में पेपर मिलों का गंदा पानी लगातार बह रहा है। सवाल ये है कि क्या प्रशासन सिर्फ एक हफ्ते के लिए भी इस गंदे पानी को रोक नहीं पाया? या फिर छठ जैसे सबसे बड़े लोकआस्था के पर्व से उसे कोई मतलब ही नहीं?

आज मीडिया से बातचीत में नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकुर वर्मा ने सफाई की बड़ी-बड़ी बातें जरूर कीं, पर सवाल ये भी उठता है — क्या ये काम आरती या निरीक्षण के दिन याद आया? जबकि उनके कार्यकाल में यह तीसरा छठ पर्व पड़ रहा है, और हालात साल-दर-साल बदतर ही होते जा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जिलाधिकारी रवीश गुप्ता स्वयं देवरिया जिले के निवासी हैं, जहां छठ पर्व बेहद भव्यता से मनाया जाता है। फिर भी जब उन्होंने पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के साथ घाट का निरीक्षण किया, तो क्या उन्हें यह बदबू नहीं आई? क्या काला पानी उनकी नजरों से बच गया?

आखिर क्यों हर साल छठ पर्व से पहले ही प्रशासन की नींद खुलती है, और निरीक्षण के बाद फिर वही ढाक के तीन पात?

इस बार बस्ती के छठव्रती न केवल सूर्य देव की आराधना करेंगे, बल्कि प्रशासन की नाकामी के बीच आस्था की असली परीक्षा भी देंगे — कुआँनो के काले पानी में खड़े होकर, श्रद्धा की डोर थामे।

(NGV PRAKASH NEWS)

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