हुई अनोखी शादी: शादी के बाद वर-वधू नें दिया यह संदेश..

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फरीदाबाद में सादगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, कौर दंपती ने बेटे की शादी को बनाया मिसाल

फरीदाबाद।
सेक्टर-17 निवासी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट संजीव कौरा और उनकी पत्नी रितु कौरा ने अपने बेटे लक्ष्य पवन श्याम की शादी को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मूल्यों का प्रतीक बनाकर अनोखी मिसाल पेश की। विवाह समारोह में न दिखावा था, न बैंड-बाजा, न आतिशबाजी और न ही दहेज। परिवार ने मिलनी (मिल्ली) के दौरान मेहमानों का स्वागत पौधे और बीज भेंट कर किया, जिससे समारोह को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है।

कौरा दंपती की इच्छा थी कि बेटे की शादी पूरी सादगी से हो और किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार न किया जाए। लक्ष्य पवन श्याम कौरा, जिन्होंने प्रिस्टन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है और अपना व्यवसाय करते हैं, ने भी माता-पिता की सोच का समर्थन किया। वधू पूजा मलिक उद्यमी हैं। उनके पिता सुनील मलिक एक निजी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हैं, मां रूपा मलिक गृहिणी हैं और भाई अर्जुन मलिक गोल्फ कोच हैं। पूजा का परिवार बल्लभगढ़ में निवास करता है।

शोर-शराबे से दूर, 60 लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ विवाह

विवाह समारोह के लिए राजस्थान के ऐतिहासिक सामोद गांव को चुना गया, जो अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में अपनी कलात्मक वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां निकली बरात पूरी तरह सादगीपूर्ण थी—न बैंड-बाजा, न आतिशबाजी और न कोई अनावश्यक प्रदर्शन। वर पक्ष की ओर से 30 और वधू पक्ष की ओर से 30 मेहमान ही समारोह में शामिल हुए।

वर-वधू ने पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

विवाह के बाद वर और वधू ने वेदी के पास तथा घर के आंगन में एक-एक पौधा लगाया। वधू के पिता सुनील मलिक ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि बेटी ऐसे परिवार में जाए, जहां विचारधारा और मूल्य समान हों। लक्ष्य पवन और कौरा परिवार के विचारों से मेल खाने पर रिश्ता तय किया गया।

उन्होंने कहा कि फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में नवंबर से जनवरी तक प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए विवाह को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और दहेज प्रथा से दूरी बनाने का प्रतीक बनाया गया।

वर-वधू के अनुसार, लगाया गया पौधा उनके रिश्ते में विकास, समानता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की जड़ों को मजबूत करने का प्रतीक है।

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