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शादी का वादा कर बनाए गए संबंधों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
19 नवंबर 2025
शादी का झांसा देकर बनाए गए यौन संबंधों के मामलों पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक अहम निर्णय सुनाते हुए कहा है कि कानूनी रूप से शादीशुदा महिला को शादी के वादे पर यौन संबंधों के लिए सहमत किया जाना अकल्पनीय है। अदालत ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया और कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक दायित्व तय करना उचित नहीं है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता (महिला) शादीशुदा है और इसके बावजूद किसी अन्य पुरुष के साथ लंबे समय तक सहमति से संबंध रखती है, तो इसे शादी का अपमान माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा 90 लागू नहीं होती, क्योंकि यहां तथ्यों की गलत धारणा में दी गई सहमति का प्रश्न ही नहीं उठता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिए गए बयान और एफआईआर की सामग्री मान भी ली जाए, तब भी यह मान लेना असंभव है कि एक परिपक्व, विवाहित महिला को शादी का वादा कर यौन संबंधों के लिए सहमत किया जा सकता है। अदालत ने यह भी पाया कि महिला एक वकील है और यह जानती थी कि वह अपने पति के साथ कानूनी रूप से विवाहित है।
निर्णय में हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायत तब दर्ज कराई गई, जब महिला की बहन की सगाई उसी व्यक्ति से हो गई, जिसके साथ महिला संबंध में थी। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भावनात्मक आघात की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
एफआईआर में आईपीसी की धारा 506 के तहत धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था, लेकिन कोर्ट ने पाया कि आरोपों में वास्तव में कौन-से शब्द कहे गए, इसका विवरण नहीं है। इस कारण यह भी निर्धारित नहीं हो सका कि धमकी देने की नीयत थी या नहीं। अदालत ने एफआईआर में तारीख और स्थान का उल्लेख न होने को भी गंभीर कमी माना।
इस पूरे मामले में अदालत का निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों को समझने और कानूनी दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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