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बस्ती में मिलावटी खाद्य पदार्थों का गोरखधंधा बेखौफ,126 नमूनों में 66 फेल, सेहत पर मंडरा रहा खतरा | NGV PRAKASH NEWS
बस्ती। जिले में दूध, पनीर, खोवा और मिठाई जैसे दैनिक उपभोग के खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग द्वारा अप्रैल से अक्तूबर तक विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए कुल 411 नमूनों में से 126 की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिनमें 66 नमूने अधोमानक पाए गए हैं। विभाग ने संबंधित दुकानदारों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया है।
दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट की स्थिति चिंताजनक है। बाजार में खुलेआम ऐसा दूध बेचा जा रहा है जिसमें अरारोट, मैदा, सिंघाड़े का आटा, पानी और यहां तक कि पीला रंग तक मिलाया जा रहा है। उपभोक्ताओं के अनुसार गाय का दूध 40 से 60 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं। विभागीय जांच ने साफ किया है कि लिए गए दूध के 18 नमूनों में 12 फेल पाए गए। वहीं खोवा, पनीर और मिठाइयों के 95 नमूनों में से 14 रिपोर्ट के अनुसार दो नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई नमूनों में ऐसे तत्व मिले हैं जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी दूध, पनीर, खोवा और मिठाइयां स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इनके नियमित सेवन से यकृत, गुर्दा, हृदय, आंखों तथा मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय सतर्कता बरतें।
मिलावट की पहचान भी कुछ सरल तरीकों से की जा सकती है। दूध में पानी की मिलावट जानने के लिए ब्लॉटिंग पेपर पर कुछ बूंदें डालने से पता चल जाएगा—क्योंकि पानी सोख लिया जाएगा, जबकि शुद्ध दूध पेपर पर नहीं टिकेगा। खोवा की शुद्धता का अंदाजा इसके स्वाद और सुगंध से लगाया जा सकता है।
जिले में लगातार सामने आ रही मिलावट की घटनाएं आम लोगों के स्वास्थ्य व सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। विभागीय कार्रवाई जारी है, लेकिन उपभोक्ताओं की जागरूकता ही इस खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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