कोविड वैक्सीन:सच्चाई जान उड़ जाएंगे आपके होश..

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कोविड वैक्सीन पर नए दावों से छिड़ी बहस, विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
05 दिसंबर 2025 | NGV PRAKASH NEWS

कोरोना महामारी के दौरान करोड़ों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाली कोविड वैक्सीन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अमेरिका में वैक्सीन से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर एक नया दावा सामने आया है, जिसने वैज्ञानिक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां अब भी साफ कहती हैं कि वैक्सीन के सामान्य साइड इफेक्ट्स मामूली होते हैं और जानलेवा नहीं होते, फिर भी ताजा दावे ने बहस को नया मोड़ दे दिया है।

अमेरिका के वैक्सीन अधिकारी विनय प्रसाद द्वारा जारी एक मेमो ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रसाद ने दावा किया है कि कोविड वैक्सीन से 7 से 16 वर्ष की उम्र के कम से कम 10 बच्चों की मौत हुई है। कहा गया कि ये मौतें 2021 से 2024 के बीच रिपोर्ट हुईं और इसका आधार VAERS नाम की एक रिपोर्टिंग प्रणाली है, जहां कोई भी व्यक्ति किसी भी घटना की जानकारी दे सकता है। हालांकि मेमो में न तो इन मौतों का ठोस कारण बताया गया और न ही ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण पेश किया गया, जिससे वैक्सीन और मौतों के बीच सीधा संबंध स्थापित होता हो।

यही वजह है कि विशेषज्ञ इस दावे को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व CDC अधिकारी डैन जर्निगन ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा दावा नहीं देखा है जिसमें बिना साक्ष्य इतने गंभीर निष्कर्ष निकाले जाएं। वैक्सीन विशेषज्ञ पॉल ऑफिट ने भी स्पष्ट कहा कि इतने बड़े आरोप को मजबूत डेटा के बिना पेश करना वैज्ञानिक रूप से गलत है। विशेषज्ञों ने यह भी दोहराया कि मायोकार्डाइटिस, जिसका उल्लेख मेमो में है, कोविड संक्रमण के दौरान वैक्सीन की तुलना में अधिक गंभीर रूप में दिखाई देता है।

स्वास्थ्य समुदाय का मानना है कि VAERS सिर्फ एक रिपोर्टिंग टूल है और इसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। मौतों की पुष्टि या कारण तय करने के लिए VSD जैसे विस्तृत और विश्वसनीय डेटाबेस होते हैं। ट्रेसी बेथ होएग इस मामले की अलग से जांच कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

प्रसाद ने यह भी कहा है कि भविष्य में किसी भी वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले रैंडमाइज्ड ट्रायल अनिवार्य किए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया फ्लू जैसी वायरस-जनित बीमारियों की वैक्सीन पर असर डाल सकती है, क्योंकि हर साल नए स्ट्रेन के हिसाब से इनके अपडेट और ट्रायल संभव नहीं होते। कई वैक्सीन एक साथ देने के नियमों पर भी पुनर्विचार की बात कही गई है, जबकि अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं कि संयुक्त वैक्सीनेशन से कोई जोखिम बढ़ता है।

वैक्सीन नीति विशेषज्ञ डोरिट रीस का कहना है कि ऐसे दावों से बिना वजह डर फैल सकता है और वैक्सीन बाजार पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक बड़ी संख्या इस बात पर सहमत है कि कोविड वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभाव बेहद दुर्लभ हैं और यह महामारी नियंत्रण में अब भी सबसे प्रभावी उपायों में से एक रही है।

बहस अभी जारी है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय का स्पष्ट मानना है कि किसी भी दावे को वैज्ञानिक प्रमाणों की कसौटी पर परखा जाना जरूरी है, क्योंकि ऐसी सूचनाएं सीधे तौर पर जनविश्वास और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

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