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एक्सप्रेसवे के सुरक्षा कैमरों का दुरुपयोग, एटीएमएस मैनेजर बर्खास्त—गोपनीयता पर गंभीर सवाल
सुल्तानपुर,
09 दिसंबर 2025,
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर तैनात एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भारी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सप्रेसवे पर लगे हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों का मूल उद्देश्य सड़क हादसों की रोकथाम, ओवरस्पीडिंग की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत अलर्ट देना है, लेकिन यही कैमरे लोगों की निजता भंग करने और ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। आरोपों की पुष्टि होते ही आरोपी मैनेजर आशुतोष सरकार को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब कार के भीतर बैठे एक जोड़े का ‘अंतरंग वीडियो’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। जांच में सामने आया कि यह फुटेज किसी निजी फोन से नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे के आधिकारिक कैमरे से रिकॉर्ड किया गया था। पीड़ितों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजा और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। शिकायत पत्र सोशल मीडिया पर फैलते ही मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
हलियापुर थाना क्षेत्र में स्थित टोल प्लाजा पर एटीएमएस सिस्टम तैनात है, जिसके तहत पूरे एक्सप्रेसवे पर तीन कर्मचारी चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग करते हैं। लेकिन इस व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले मैनेजर आशुतोष सरकार पर आरोप है कि उसने अपनी आधिकारिक पहुंच का दुरुपयोग करते हुए कई वाहनों के निजी पलों, प्रेम प्रसंगों और कार के भीतर की गतिविधियों के वीडियो निकालकर उन्हें वायरल किया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वह वीडियो दिखाकर प्रभावित व्यक्तियों से बड़ी रकम वसूलता था। कई बार तो पैसे लेने के बावजूद वीडियो वायरल कर देता था।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे से लगे गांवों की महिलाओं के बाहर शौच या अन्य निजी क्षण भी कैमरों में कैद होते थे और मैनेजर इन वीडियो को निकालकर उन्हें भेजकर धमकाता था। इसने न सिर्फ लोगों की निजता पर गंभीर हमला किया, बल्कि सिस्टम की सुरक्षा और डेटा एक्सेस मैकेनिज्म पर भी बड़े सवाल उठा दिए।
एटीएमएस के ढांचे के तहत मॉनिटरिंग रूम में फुटेज तक सीमित और फायरवॉल से संरक्षित एक्सेस की अनुमति होती है, लेकिन इस सुरक्षा चक्र में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी—इसकी जांच शुरू कर दी गई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डेटा एक्सेस से जुड़े नियमों और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जाएगी ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
आरोपी आशुतोष सरकार सुपर वेव कम्युनिकेशन एंड इन्फ्रा सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर तैनात था, जो एनएचएआई के अधीन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पैकेज-3 का संचालन देखती है। कंपनी ने घटना की पुष्टि के बाद तुरंत उसे सेवा से हटा दिया और कहा कि यात्रियों की निजता से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजे जाने के बाद मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि यह पता लगाया जाए कि सिस्टम तक व्यक्तिगत एक्सेस किस तरह संभव हुआ और क्या इस नेटवर्क में किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता है। स्थानीय प्रशासन भी इस मामले को गंभीर अपराध की श्रेणी में मानते हुए रिपोर्ट और तकनीकी विश्लेषण तैयार कर रहा है।
यह प्रकरण न केवल सिस्टम की तकनीकी सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यात्रियों की गोपनीयता की रक्षा के लिए नई नीतियों और कड़े प्रोटोकॉल की मांग भी तेज कर सकता है। लोग अब यह पूछ रहे हैं कि अगर सुरक्षा कैमरे ही सुरक्षा भंग करने का माध्यम बन जाएं, तो भरोसा कहाँ बचता है।
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