6 साल की बच्ची के साथ की थी ऐसी दरिंदगी की रूह कांप जाये :अब मिली ऐसी सजा कि…….

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यूपी के बांदा में मासूम से हैवानियत करने वाले दोषी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

बांदा, 06 जनवरी 2026।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में छह वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म और निर्मम हिंसा के मामले में अदालत ने दोषी युवक को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो व अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 56 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी अमित रैकवार को दोषी करार देते हुए उसे मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया। अदालत ने अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अर्थदंड की राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। फैसला सुनाए जाने के बाद आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

अभियोजन के अनुसार यह घटना कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पीड़िता के पिता ने 25 जुलाई 2025 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि उस दिन पति-पत्नी खेत में थे और घर पर छह वर्षीय बेटी अकेली थी। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पड़ोसी अमित रैकवार बच्ची को दस रुपये देकर गुटखा लाने के बहाने अपने घर ले गया। वहां उसने दरवाजा बंद कर बच्ची के साथ दुष्कर्म और कुकर्म किया। इतना ही नहीं, उसने बच्ची के सीने और नाजुक अंगों को दांतों से काटकर जख्मी कर दिया और पहचान छिपाने के इरादे से उसे मार डालने की कोशिश की। बच्ची का हाथ तोड़ दिया गया और जीभ काट दी गई।

शाम को जब मां खेत से चारा लेकर घर पहुंची तो बच्ची नहीं मिली। तलाश करते हुए पिता गांव में अमित रैकवार के घर पहुंचे, जहां बच्ची आंगन में खून से लथपथ पड़ी मिली। आरोपी वहां खड़ा था और पिता को देखते ही भाग गया। बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। उसके मुंह और गुप्तांग से खून बह रहा था और शरीर पर दांतों से काटे जाने के निशान थे। बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

बच्ची ने उपचार के दौरान रोते हुए पूरे घटनाक्रम का बयान दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सात अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए गए और चार नवंबर 2025 से गवाहों की सुनवाई शुरू हुई। कुल दस गवाह पेश किए गए।

अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए 46 पृष्ठीय फैसले में उसे मृत्यु तक फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है और इसमें कठोरतम दंड आवश्यक है।

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