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ऑफिस चैंबर का वीडियो वायरल, कर्नाटक के सीनियर आईपीएस डॉ. के. रामचंद्र राव सस्पेंड
बेंगलुरु, 21 जनवरी 2026 —
कर्नाटक कैडर के सीनियर आईपीएस अधिकारी डॉ. के. रामचंद्र राव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। वायरल वीडियो में एक सरकारी कार्यालय के भीतर आपत्तिजनक दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकारी को निलंबित कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि यह वीडियो अधिकारी के कार्यालय कक्ष में लगे कैमरों से रिकॉर्ड हुआ, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारी को नहीं थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह रिकॉर्डिंग हालिया नहीं बल्कि करीब एक वर्ष पुरानी बताई जा रही है। वीडियो के सामने आने के बाद निजता, सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी दफ्तरों में निगरानी प्रणालियों के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कैमरों से रिकॉर्डिंग की गई, वे सामान्य सुरक्षा सीसीटीवी से अलग, अत्यधिक संवेदनशील और गोपनीय रिकॉर्डिंग में सक्षम बताए जा रहे हैं।
डॉ. के. रामचंद्र राव की ओर से सफाई दी गई है कि वायरल वीडियो कथित तौर पर मॉर्फ्ड है और इसके पीछे साजिश हो सकती है। वहीं पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कैमरे किसने लगाए, रिकॉर्डिंग किस उद्देश्य से की गई और इसे अब सोशल मीडिया पर क्यों प्रसारित किया गया।
इस पूरे विवाद के बीच एक बार फिर अधिकारी के पारिवारिक पक्ष की चर्चा भी तेज हो गई है। डॉ. रामचंद्र राव की बेटी, कन्नड़ अभिनेत्री , पहले से ही सोना तस्करी के एक बड़े मामले में जेल में बंद हैं। रान्या राव को पिछले वर्ष दुबई से बेंगलुरु आते समय 14.8 किलो सोने की तस्करी के आरोप में ने से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के चलते वह रडार पर थीं और बाद में ने भी उनके खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।
रान्या राव कन्नड़ फिल्म में सुपरस्टार के साथ नजर आ चुकी हैं। फिलहाल वह में सजा काट रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके पास से भारी मात्रा में सोना, नकदी और संपत्तियां जब्त की गई थीं।
वायरल वीडियो प्रकरण को लेकर अधिकारियों का कहना है कि इसमें सहमति या जबरदस्ती जैसे किसी आपराधिक आरोप की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ड्यूटी के दौरान सरकारी परिसर में कथित आचरण को सेवा नियमों और अनुशासन के खिलाफ माना जा रहा है। इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो की प्रामाणिकता क्या है और इसके पीछे किसका उद्देश्य था।
इस मामले ने एक बार फिर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही, सरकारी संस्थानों की छवि और निगरानी तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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