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कानपुर का डीएम बनने का झांसा देकर 72 लाख की ठगी, शादी से पहले ससुरालियों को किया कंगाल
कानपुर, 21 जनवरी 2026 —
कानपुर में एक हैरान करने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाले युवक ने शादी से पहले ही होने वाले ससुराल पक्ष से करीब 72 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने दावा किया था कि उसका चयन यूपीएससी के जरिए हो चुका है और फाइनल इंटरव्यू के बाद उसे कानपुर का जिलाधिकारी बनाया जा रहा है, जिसके लिए कथित तौर पर ऊपर तक पैसे पहुंचाने होंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र की रहने वाली युवती का रिश्ता उन्नाव निवासी युवक के माध्यम से नीतीश पांडे से तय हुआ था। नीतीश पांडे ने खुद को से चयनित अधिकारी बताते हुए युवती और उसके परिवार का भरोसा जीत लिया। उसने फर्जी जॉइनिंग लेटर और ईमेल दिखाकर यह दावा किया कि उसकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और जल्द ही उसे का जिला अधिकारी बनाया जाएगा।
आरोपी ने यह भी कहा कि कानपुर जैसे बड़े जिले की डीएम पोस्टिंग के लिए इंटरव्यू के नाम पर भारी रकम देनी होगी। बेटी के भविष्य और होने वाले दामाद के प्रभावशाली पद के लालच में परिवार ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी उसे सौंप दी। पीड़ित परिवार ने करीब 71 से 72 लाख रुपये किस्तों में दिए, जिसके लिए उन्हें पुश्तैनी जेवर, घर में रखी चांदी और अन्य कीमती सामान तक बेचने पड़े।
लगभग छह महीने तक आरोपी ट्रेनिंग और पोस्टिंग के बहाने परिवार को टालता रहा। जब न शादी की तारीख तय हुई और न ही कोई नियुक्ति पत्र सामने आया, तो युवती को शक हुआ। जांच करने पर सामने आया कि नीतीश पांडे का आईएएस से कोई लेना-देना नहीं है और दिखाए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और फोटोशॉप किए हुए थे।
सच्चाई सामने आने के बाद जब परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने धमकी देना शुरू कर दिया। उसने युवती की निजी तस्वीरें और संदेश वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया, जिससे परिवार और अधिक मानसिक दबाव में आ गया।
आखिरकार पीड़ित परिवार ने हिम्मत जुटाकर पुलिस से संपर्क किया। कल्याणपुर थाने में नीतीश पांडे और उसके परिवार के खिलाफ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है और मामले से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन व फर्जी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी पहचान और सरकारी पद का लालच देकर परिवार को ठगी का शिकार बनाया। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
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