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बस्ती के आईटीबीपी कमांडेंट सुभाष चंद्र यादव को राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पुलिस पदक
बस्ती, 26 जनवरी 2026.
बस्ती जिले के मुंडेरवा क्षेत्र अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी आईटीबीपी कमांडेंट सुभाष चंद्र यादव को राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें राष्ट्र के प्रति उनकी असाधारण सेवाओं, उत्कृष्ट नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित इस सम्मान से जिले में हर्ष और गौरव का माहौल है।
कमांडेंट सुभाष चंद्र यादव, फूल चंद्र यादव और राम लौटी देवी के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राइमरी स्कूल अहारा से प्राप्त की। इसके बाद यूपी सैनिक स्कूल लखनऊ से शिक्षा ग्रहण की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। अगस्त 1999 में उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में असिस्टेंट कमांडेंट (डीई) के रूप में अपनी सेवा शुरू की।
अपने अब तक के सेवा काल में उन्होंने भारत-चीन सीमा के कई दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन इलाकों में तैनाती के दौरान उन्होंने अनुशासन, साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने बल में विभिन्न कमांड और स्टाफ पदों पर भी कार्य किया।
कमांडेंट सुभाष चंद्र यादव ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड में छह वर्षों तक सेवा दी। इस दौरान चेन्नई, लखनऊ और दिल्ली में टास्क फोर्स की कमान संभाली और फोर्स-01 मुख्यालय में स्टाफ पद पर भी तैनात रहे। कॉमनवेल्थ गेम्स-2010 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें डीजी एनएसजी का डिस्क और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।
वर्ष 2017 में कमांडेंट के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने 36वीं, 47वीं और 39वीं बटालियन की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में इन इकाइयों को “बेस्ट ग्रीन बटालियन-2019”, “बेस्ट बॉर्डर बटालियन एनडब्ल्यू फ्रंटियर-2022” और “बेस्ट नॉन-बॉर्डर बटालियन-2023” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए।
उन्होंने सिक्किम के नाथुला से कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई और संपर्क अधिकारी के रूप में दायित्वों का निर्वहन किया। वर्ष 2012-13 में सिक्किम में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में उनके योगदान के लिए सिक्किम सरकार द्वारा कई बार सराहना की गई।
लद्दाख में गलवान घाटी झड़पों के दौरान भी उन्होंने अपने जवानों का नेतृत्व किया। अब तक की सेवा में उन्हें कुल 10 मेडल, 12 प्रशंसा पत्र और 61 सराहना पत्र प्राप्त हो चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे बस्ती जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।
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