दरभंगा में एक गांव के सभी 210 पर एससी-एसटी का केस…….

💥 जो दूसरे शहरों में कमाने गए हैं उन पर भी दर्ज हुआ केस….

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दरभंगा के हरिनगर गांव में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज सामूहिक एफआईआर, 210 लोगों को बनाया गया आरोपी

दरभंगा, 04 फरवरी 2026

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार
बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिनगर गांव से सामने आया मामला इन दिनों प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां एक लेन-देन और मजदूरी विवाद ने ऐसा रूप ले लिया कि गांव के लगभग पूरे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ SC/ST (अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। पुलिस एफआईआर में करीब 70 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 100 से 150 अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 210 लोगों के नाम इस एक ही मामले से जोड़े जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विवाद की जड़ मजदूरी भुगतान से जुड़ी है। शिकायतकर्ता अशर्फी पासवान ने आरोप लगाया है कि उसके बेटे की मजदूरी की राशि करीब पांच वर्षों से बकाया थी, जिसे मांगने पर विवाद उत्पन्न हुआ। 30 जनवरी 2026 को इस मामले को पंचायत के समक्ष रखा गया, लेकिन बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। अगले दिन 31 जनवरी की सुबह, शिकायतकर्ता के बेटे के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें लाठी-डंडे और लोहे की रॉड के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। शिकायत में जातिसूचक शब्दों के प्रयोग की बात भी कही गई है, जिसके आधार पर SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं।

एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि मारपीट के दौरान घर में घुसकर हमला किया गया और नकदी व घरेलू सामान की चोरी हुई। इस घटना में महिलाओं और बच्चों के घायल होने की भी बात सामने आई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

💥इस मामले को लेकर सबसे बड़ा विवाद इस बात पर खड़ा हुआ है कि एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें से कई वर्तमान में गांव में रहते ही नहीं हैं। स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अनेक नामजद आरोपी दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में मजदूरी या नौकरी करते हैं और घटना के समय गांव में उनकी मौजूदगी नहीं थी। इसके बावजूद उनके नाम प्राथमिकी में शामिल किए गए हैं, जिससे गांव में नाराजगी और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

📍मामले में पुलिस का कहना है कि एफआईआर शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है और जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।

घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हुआ है। एफआईआर की प्रति साझा करते हुए कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि क्या एक पूरे समुदाय को सामूहिक रूप से आरोपी बनाया जाना न्यायसंगत है।

फिलहाल हरिनगर गांव में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और मामले की निष्पक्ष विवेचना के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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