बोर्ड परीक्षा से पहले तनाव नहीं तैयारी जरूरी, सही रणनीति से बच्चों के लिए उत्सव बन सकती है परीक्षा…….भावुक

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बोर्ड परीक्षा से पहले तनाव नहीं तैयारी जरूरी, सही रणनीति से बच्चों के लिए उत्सव बन सकती है परीक्षा

बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और इसके साथ ही लाखों छात्रों और अभिभावकों के मन में तनाव बढ़ने लगा है।

अच्छे अंक, भविष्य की चिंता, अभिभावकों की अपेक्षा और सामाजिक दबाव अक्सर बच्चों को मानसिक रूप से थका देता है।

वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तैयारी सही दिशा में हो और माहौल सहयोगात्मक रखा जाए, तो यही परीक्षा बच्चों के लिए डर नहीं बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर बन सकती है।

💥शिक्षाविदों के अनुसार, परीक्षा को जीवन का अंतिम पैमाना मानने की सोच ही सबसे बड़ा तनाव पैदा करती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि परीक्षा केवल उनकी समझ और मेहनत को परखने का माध्यम है, न कि उनके पूरे भविष्य का फैसला। जब यह बात बच्चे के मन में बैठ जाती है, तो उसका आत्मविश्वास स्वतः बढ़ने लगता है।

शिक्षाविदों का कहना है कि तैयारी को लेकर

*अचानक लंबे समय तक पढ़ने के बजाय नियमित और संतुलित अध्ययन पर जोर देना चाहिये।

*रोज़ाना तय समय पर पढ़ाई, कठिन विषयों को सुबह के समय पढ़ना और बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना दिमाग को तरोताजा रखता है।

*पूरे सिलेबस को एक साथ देखने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने से घबराहट कम होती है और लक्ष्य स्पष्ट रहता है।

👉समाज सेवक,शिक्षक और सूर्या पब्लिक इंटर कालेज, नगर बाजार -बस्ती शिक्षण संस्थान के प्रबंधक “सूर्य नारायण उपाध्याय भावुक ” नें कहा कि बोर्ड परीक्षा में उत्तर लिखने की शैली भी अहम भूमिका निभाती है। केवल पढ़ने से ज्यादा जरूरी है लिखकर अभ्यास करना। पुराने प्रश्नपत्रों को समय सीमा में हल करने से बच्चों को परीक्षा हॉल का अनुभव पहले ही मिल जाता है, जिससे वास्तविक परीक्षा में डर कम हो जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि मोबाइल और सोशल मीडिया को लेकर पूरी तरह सख्ती करने के बजाय संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। पढ़ाई के समय मोबाइल से दूरी और ब्रेक के समय सीमित उपयोग बच्चों को मानसिक रूप से संतुलित रखता है। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, हल्का और पौष्टिक भोजन तथा नियमित दिनचर्या बच्चे की एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होती है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि माता-पिता का व्यवहार बच्चों की परीक्षा तैयारी में निर्णायक भूमिका निभाता है। तुलना, दबाव और डांट की जगह अगर भरोसा और संवाद हो, तो बच्चा खुद को अकेला महसूस नहीं करता। घर का शांत और सकारात्मक माहौल परीक्षा के तनाव को काफी हद तक कम कर देता है।

कुल मिलाकर, अगर परीक्षा को डर के रूप में नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखा जाए, तो बोर्ड की तैयारी बच्चों के लिए सिरदर्द नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सफलता की ओर बढ़ने वाला उत्सव बन सकती है।

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