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भोपाल में अनोखा पारिवारिक समझौता: महिला अधिकारी ने प्रेमी की पत्नी को डेढ़ करोड़ देकर कराया तलाक, कुटुंब न्यायालय में हुआ निपटारा
भोपाल (मध्य प्रदेश), 14 फरवरी 2026.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मान्यताओं पर नई बहस छेड़ दी है। यहां एक केंद्रीय सरकारी विभाग में कार्यरत महिला अधिकारी ने अपने से 12 वर्ष छोटे सहकर्मी के साथ संबंध बनाए रखने के लिए उसकी पत्नी को करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति और नकद देकर आपसी सहमति से तलाक का समझौता कराया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 42 वर्षीय पुरुष अधिकारी और उसकी 54 वर्षीय सहकर्मी महिला अधिकारी के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध चल रहा था। यह संबंध धीरे-धीरे इतना गहरा हो गया कि पुरुष अधिकारी ने अपने परिवार, पत्नी और दो बेटियों से दूरी बनानी शुरू कर दी। घर में लगातार विवाद और तनाव की स्थिति बनने लगी, जिसका सबसे ज्यादा असर उनकी 16 और 12 वर्ष की बेटियों पर पड़ा। परिवार में बढ़ते तनाव के चलते मामला अंततः भोपाल के कुटुंब न्यायालय तक पहुंच गया।
कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान पुरुष अधिकारी ने स्पष्ट रूप से अपनी पत्नी के साथ रहने से असहमति जताई और अपनी सहकर्मी के साथ जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त की। इस स्थिति में पत्नी ने बेटियों के भविष्य और अपनी आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समझौते की शर्त रखी। उसने अपने और बेटियों के भरण-पोषण के लिए एक डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद की मांग की, जिसकी कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई।
बताया गया कि पुरुष अधिकारी की प्रेमिका, जो स्वयं एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत है, ने बिना किसी विवाद के इस शर्त को स्वीकार कर लिया। उसने यह तर्क दिया कि वह अपने साथी के परिवार को आर्थिक रूप से असुरक्षित नहीं छोड़ना चाहती और इसी कारण उसने यह वित्तीय जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।
काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हुआ और न्यायालय की प्रक्रिया के तहत तलाक की कार्रवाई पूरी की गई। इस मामले की चर्चा न्यायिक और सामाजिक हलकों में व्यापक रूप से हो रही है, क्योंकि यह मामला पारंपरिक पारिवारिक विवादों से अलग एक असाधारण वित्तीय समझौते का उदाहरण बनकर सामने आया है।
पारिवारिक परामर्शदाताओं का मानना है कि जब वैवाहिक संबंधों में भावनात्मक जुड़ाव समाप्त हो जाता है और विवाद का माहौल बन जाता है, तो आपसी सहमति से सम्मानजनक समाधान निकालना बच्चों और परिवार के भविष्य के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
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