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कनिष्ठ सहायक के घर ACB की रेड में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा, 1 किलो सोना, 75 लाख नकद और 100 बीघा जमीन मिली
बीकानेर 14 फरवरी 2026.
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई में एक कनिष्ठ सहायक के घर से करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत विभाग में तैनात कनिष्ठ सहायक शुभकरण परिहार के पांच ठिकानों पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
टीम को शुभकरण परिहार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ब्यूरो ने न्यायालय से अनुमति लेकर बीकानेर और फलोदी जिले में उसके आवास और अन्य संबंधित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर छिपाकर रखी गई करीब 75 लाख रुपये से अधिक की नकदी मिली, जिसे गिनने के लिए मशीन की सहायता लेनी पड़ी।
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा एक किलो से अधिक सोने के आभूषणों के रूप में हुआ, जिसकी बाजार कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है। इसके अलावा करीब दो किलो चांदी और कई कीमती सामान भी बरामद किए गए हैं। टीम को जांच के दौरान कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें बीकानेर में तीन मकान और पैतृक गांव पुनरासर में एक मकान शामिल है।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि शुभकरण परिहार के नाम पर करीब 100 बीघा कृषि भूमि दर्ज है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में यह पाया गया है कि कनिष्ठ सहायक ने अपनी वैध आय से लगभग 938 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है, जो गंभीर भ्रष्टाचार का संकेत है।
शुभकरण परिहार पंचायत समिति बाप के अंतर्गत कानासर ग्राम पंचायत में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत था। एक सामान्य सरकारी कर्मचारी के पास इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति मिलने से प्रशासनिक हलकों में भी आश्चर्य और चिंता का माहौल है।
टीम के अधिकारियों ने बताया कि मामले में आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर लिया गया है और बैंक खातों, लॉकर तथा अन्य निवेश की भी गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संपत्ति का कुल मूल्य और भी अधिक सामने आ सकता है।
इस कार्रवाई को राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे सरकारी विभागों में अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का स्पष्ट संदेश गया है।
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