आज लगेगा 2026 का पहला सूर्य ग्रहण- भारत में क्या होगा इसका असर…….

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🌞 आज लगेगा साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा नज़ारा

नई दिल्ली 17 फरवरी 26.
आज यानी 17 फरवरी 2026, मंगलवार को वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में ही इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा।

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरेगा, लेकिन सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा ( लगभग 90% सूरज कबर कर लेगा) । परिणामस्वरूप सूर्य के किनारों पर आग के छल्ले जैसा प्रकाश दिखाई देगा।


⏰ ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)

🌅 ग्रहण आरंभ: दोपहर लगभग 3:26 बजे

🌕 मध्य काल: शाम 5:40 बजे के आसपास

🌇 समापन: शाम लगभग 7:57 बजे

⏳ कुल अवधि: करीब 4 घंटे 30 मिनट

💥हालांकि यह समय भारत के अनुसार है, लेकिन चूंकि ग्रहण का मार्ग भारत से होकर नहीं गुजर रहा, इसलिए देश में इसका दृश्य नहीं मिलेगा।


🌍 किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा। इसमें शामिल हैं —

❄️ अंटार्कटिका

🌍 दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्से

🌎 दक्षिणी अमेरिका के कुछ देश

🌊 दक्षिणी महासागरीय क्षेत्र

इन स्थानों पर लोग सूर्य के चारों ओर चमकते वलय (छल्ले) का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे।


🛕 सूतक काल को लेकर स्थिति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य और पूजा-पाठ वर्जित होते हैं।
लेकिन चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए —

✅ भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा
✅ मंदिर सामान्य रूप से खुले रहेंगे
✅ विवाह, पूजा और अन्य मांगलिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी


🔬 वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इससे सूर्य की किरणें आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से ढक जाती हैं। इस तरह की घटनाएं वैज्ञानिकों को सूर्य के वातावरण और उसकी किरणों का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करती हैं।

👉आज लगने वाला सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत के लोगों को इसे देखने का मौका नहीं मिलेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा। भारत में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही सूतक काल लागू होगा।

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