उज्ज्वला योजना वाले लाभार्थियों को अब साल में 9 की जगह मिलेंगे 4 सिलेंडर…….

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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका, अब साल में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर मिलेंगे

नई दिल्ली, 8 जून 2026।

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के करोड़ों लाभार्थियों को बड़ा झटका देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। अब उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को साल भर में केवल 4 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर ही मिलेंगे। इससे पहले यह संख्या 9 थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत और बढ़ते सब्सिडी बोझ को ध्यान में रखकर लिया गया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने सोमवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों द्वारा औसतन साल में लगभग चार सिलेंडरों का ही उपयोग किया जा रहा है। इसी आधार पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या निर्धारित की गई है।

12 से घटकर अब 4 सिलेंडर तक पहुंचा कोटा

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत शुरू में लाभार्थियों को सालाना 12 सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर मिलते थे। बाद में इस संख्या को घटाकर 9 कर दिया गया और अब इसे और कम करते हुए 4 सिलेंडर कर दिया गया है।

सरकार देती है 300 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी

सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला लाभार्थियों को राहत देने के लिए प्रति एलपीजी सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की थी। अक्टूबर 2023 में इस राशि को बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों पर भी इसी अनुपात में सब्सिडी दी जाती है।

बढ़ती कीमतों के बीच लिया गया फैसला

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत हाल ही में बढ़कर 942 रुपये पहुंच गई है। हालांकि उज्ज्वला लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद एक सिलेंडर के लिए 642 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।

पिछले तीन महीनों के दौरान घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में कुल 89 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।

मिडिल ईस्ट संकट का असर

अधिकारियों के अनुसार मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसकी कीमतें सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से जुड़ी होती हैं, जिसे वैश्विक मानक माना जाता है।

सरकार के मुताबिक फरवरी के बाद से अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण खाड़ी देशों से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे आयात लागत काफी बढ़ गई है।

सरकार पर बढ़ा सब्सिडी का बोझ

प्रवीण मल खनूजा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारत में घरेलू रसोई गैस की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक केंद्र सरकार एलपीजी सब्सिडी पर लगभग 52,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

करोड़ों परिवारों पर पड़ेगा असर

उज्ज्वला योजना के तहत देशभर में करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 किए जाने का असर सीधे इन परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि यह निर्णय वास्तविक खपत के आंकड़ों के आधार पर लिया गया है और इससे सब्सिडी का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।

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