
छत्तीसगढ़ में अनोखी खोज: तानसिंह बरवा बिना उपकरण के जल स्रोतों की पहचान कर रहे हैं
बालोद, 1 अप्रैल 2025
प्राप्त जानकारी के अनुसार..
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में रहने वाले तानसिंह बरवा पिछले 28 वर्षों से बिना किसी आधुनिक उपकरण के केवल दो तारों की मदद से जमीन के नीचे जल स्रोतों की पहचान कर रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें यह अनोखी शक्ति मां गंगा से प्राप्त हुई है। अब तक वे 10,000 से अधिक स्थानों पर जल स्रोत की जांच कर चुके हैं और उनकी सफलता दर 80% से अधिक बताई जा रही है।
गंगा मइया से मिला वरदान
तानसिंह बरवा (पुत्र बनिहार) का कहना है कि जब वे 22 वर्ष के थे, तब सपने में मां गंगा ने उन्हें जल स्रोतों का पता लगाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद, लगातार एक हफ्ते तक उन्हें विशेष अनुभव होते रहे और तब से उन्होंने इस अद्भुत क्षमता का उपयोग करना शुरू किया।
कैसे करते हैं जल स्रोत की पहचान?
तानसिंह बरवा केवल दो साधारण तारों का उपयोग करते हैं। उनका दावा है कि वे न केवल पानी की उपलब्धता का पता लगा सकते हैं, बल्कि उसकी गहराई और प्रवाह की दिशा भी बता सकते हैं। इस असाधारण क्षमता की चर्चा अब दूर-दूर तक फैल चुकी है और लोग उन्हें विभिन्न स्थानों पर जल स्रोतों की पहचान के लिए बुलाते हैं।
उनकी सेवाएं और नवरात्रि से जुड़ा अनुष्ठान
हर साल चैत्र और क्वार नवरात्रि में तानसिंह झलमला स्थित गंगा मइया मंदिर में तेल ज्योत कलश की स्थापना करते हैं। वे अपनी सेवा के बदले कोई भारी-भरकम शुल्क नहीं लेते, बल्कि केवल मंदिर में जलने वाली ज्योत कलश की राशि के बराबर शुल्क लेते हैं। पहले यह राशि ₹301 थी, जो अब ₹701 हो गई है। इसके अलावा वे कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं लेते।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और लोगों का भरोसा
अब तक वैज्ञानिक रूप से इस पद्धति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तानसिंह की लगातार मिल रही सफलता इस दावे को मजबूत बनाती है। नगर व्यवसायी राकेश चौरड़िया ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर जल स्रोत की जांच करवाई और तानसिंह के बताए अनुसार 100 मीटर की गहराई पर जल स्रोत मिला।
आस्था और विज्ञान के इस टकराव में यह मामला रोचक सवाल खड़ा करता है। हालांकि, “चमत्कार को नमस्कार” वाली कहावत तानसिंह बरवा के मामले में कहीं न कहीं सटीक बैठती है।
NGV PRAKASH NEWS
