बिजली का निजीकरण बनेगा चिंगारी? टेंडर निकलते ही सड़कों पर उतरेंगे 27 लाख बिजलीकर्मी

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बिजली का निजीकरण बनेगा चिंगारी? टेंडर निकलते ही सड़कों पर उतरेंगे 27 लाख बिजलीकर्मी
वाराणसी | 10 जून 2025 | NGV PRAKASH NEWS

जैसे ही निजीकरण की हलचलें तेज हुईं, बिजली कर्मचारियों के तेवर भी सख्त हो गए हैं। वाराणसी से उठी विरोध की आग अब पूरे देश में लपटें लेने को तैयार है। बिजलीकर्मियों ने सोमवार को एकजुट होकर एलान कर दिया—”जैसे ही निजीकरण का टेंडर निकला, वैसे ही पूरे देश के 27 लाख बिजलीकर्मी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर चले जाएंगे।”

पूर्वांचल डिस्कॉम कार्यालय बना गुस्से का केंद्र
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक कार्यालय के सामने कर्मचारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि एक चेतावनी थी। चेतावनी उस तंत्र को, जो बिजली जैसी मूलभूत सेवा को मुनाफे की मंडी में उतारने की तैयारी में है।

सभा में यह तय हुआ कि मंगलवार से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसकी शुरुआत दोपहर 3 बजे पन्नालाल पार्क उपकेंद्र से होगी। जनप्रतिनिधि और व्यापार संगठन के प्रतिनिधि भी इस मुहिम में साथ खड़े होंगे।

‘फॉल्ट नहीं सुधरते? कारण जानिए’
वक्ताओं ने आम जनता के उस सवाल को भी सीधा जवाब दिया, जो अक्सर पूछा जाता है—बिजली का फॉल्ट समय पर क्यों नहीं सुधरता?
जवाब मिला: “कमी तकनीक की नहीं, बल्कि कर्मचारियों की है। पूर्व के कुछ निर्णयों ने हजारों संविदाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब एक संविदाकर्मी 10 हजार उपभोक्ताओं से वसूली और लाइन मरम्मत—दोनों काम अकेले करेगा, तो कैसे सुधरेगा फॉल्ट?”

केंद्र सरकार को दी चेतावनी
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने केंद्र सरकार से साफ कहा—”अगर किसानों, गरीबों और आम उपभोक्ताओं का हित चाहते हो, तो निजीकरण की इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।”

सभा की झलकियां
सभा की अध्यक्षता नरेंद्र वर्मा ने की, संचालन किया सौरभ श्रीवास्तव ने। मंच पर मायाशंकर तिवारी, केके ओझा, प्रीति यादव, रुचि कुमारी, अलका कुमारी, प्रमोद कुमार, अंकुर पांडेय, संदीप कुमार, रंजीत पटेल, विजय नारायण, सुनील कुमार, मनोज यादव और हेमंत श्रीवास्तव जैसे अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी, या फिर देश की बिजली व्यवस्था किसी बड़े संग्राम की ओर बढ़ेगी।


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