भीम आर्मी चीफ पर पीएचडी स्कॉलर ने लगाया इस्तेमाल कर छोड़ने का आरोप

“राजनीति, प्रेम और भरोसे की दरकती तस्वीर: चंद्रशेखर आज़ाद पर पीएचडी स्कॉलर का गंभीर आरोप”

NGV PRAKASH NEWS

बिजनौर/इंदौर | 09 जून 2025

जिस नेता की छवि एक वक्त दलित चेतना के अग्रदूत, बहुजन युवाओं के रोल मॉडल और राजनीतिक बदलाव के प्रतीक के रूप में उभर रही थी, आज उसी के नाम पर देश के सोशल मीडिया मंचों पर एक पीड़ित स्त्री की आवाज गूंज रही है। मामला सिर्फ निजी आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहुजन आंदोलन, राजनीतिक नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे सवालों को भी घेरे में खड़ा करता है।

हम बात कर रहे हैं आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की, जिन पर इंदौर की पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि उन्हें भावनात्मक और मानसिक रूप से शोषण का शिकार बनाया गया, इस्तेमाल किया गया और फिर राजनीतिक मकसद पूरे होते ही छोड़ दिया गया।


📌 कहानी की शुरुआत: स्विट्जरलैंड से नगीना तक

डॉ. रोहिणी घावरी, एक सफाईकर्मी की बेटी हैं, जिन्होंने इंदौर के बीमा अस्पताल से संघर्षों भरी पृष्ठभूमि के साथ निकलकर स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा हासिल की। वहां वे इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन से जुड़ीं और भारत के सफाईकर्मियों की आवाज बनना चाहती थीं। उसी दौरान 2019 में उनकी मुलाकात चंद्रशेखर से हुई — जिनकी छवि उस समय वाल्मीकि समाज में एक तेजस्वी, क्रांतिकारी नेता की थी।

❤️ तीन साल का रिश्ता या राजनीतिक प्रयोग?

डॉ. रोहिणी के अनुसार, यह रिश्ता सिर्फ निजी न होकर सामाजिक आंदोलन का हिस्सा था। उन्होंने चंद्रशेखर के साथ मिलकर बहुजन आंदोलन में काम करने का सपना देखा था। वो उनके हर निर्णय में शामिल रहीं — चाहे वो नगीना से चुनाव लड़ने की रणनीति हो या पार्टी विस्तार का खाका।

लेकिन जैसे-जैसे चंद्रशेखर की राजनीतिक स्थिति मजबूत होती गई, रोहिणी खुद को ‘साइडलाइन’ होता महसूस करने लगीं। उनका आरोप है कि नवंबर 2023 के बाद, जब चंद्रशेखर को संसद में एंट्री लगभग तय हो चुकी थी, तब उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया।


😢 “विक्टिम नंबर 3”: सोशल मीडिया पर गूंजती सच्चाई

डॉ. रोहिणी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर खुद को “विक्टिम नंबर 3” बताया। उन्होंने लिखा:

> “मैं सिर्फ तीसरी नहीं हूं, बल्कि हर उस बेटी की आवाज बनूंगी जिसे इस्तेमाल कर छोड़ दिया गया। जिस दिन मेरे और चंद्रशेखर के रिश्ते की शुरुआत हुई — 3 जून 2021 — वही मेरी सबसे मनहूस तारीख बन गई।”

उनका आरोप सिर्फ भावनात्मक शोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक आंदोलन को अपनी छवि चमकाने के लिए ‘इस्तेमाल’ करने का गहरा दुख और गुस्सा भी झलकता है।


🛑 राजनीतिक प्रतिक्रिया और चुप्पी

जहां एक तरफ रोहिणी घावरी सोशल मीडिया पर इंसाफ की गुहार लगा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आजाद समाज पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के सांसद प्रतिनिधि विवेक सैन ने बयान जारी कर कहा:

“यह विपक्ष की सोची-समझी साजिश है। सांसद को बदनाम करने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं। जिन युवती ने आरोप लगाए हैं, उनके कई फोटो भाजपा की महिला नेताओं के साथ भी देखे गए हैं।”

जब मीडिया ने चंद्रशेखर से संपर्क किया, तो उन्होंने व्हाट्सएप पर केवल यह कहकर बात टाल दी — “मैं इस विषय पर कोई बात नहीं करूंगा।”


📖 सवाल जो चुप नहीं रहते

क्या एक नेता की निजी ज़िंदगी उसके सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग रखी जा सकती है?

अगर यह सिर्फ “राजनीतिक साजिश” है, तो पीड़िता के आरोपों में आया वर्षों का विवरण और दर्द कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है?

क्या दलित चेतना और नारी अस्मिता के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं को पहले खुद उन मूल्यों का पालन नहीं करना चाहिए?

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *