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मेरठ के कपसाड़ कांड में कोर्ट में पेश हुआ आरोपी पारस सोम, वकीलों और एसएसपी के बयान से खुले कई पहलू
मेरठ, 14 जनवरी 2026 —
उत्तर प्रदेश को झकझोर देने वाले मेरठ के कपसाड़ कांड में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के कथित अपहरण के मामले को लेकर अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है। पुलिस ने आरोपी पारस सोम और युवती को 11 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से पारस सोम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी के वकीलों और मेरठ के एसएसपी के बयान सामने आए हैं, जिनमें मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं की जानकारी दी गई है।
आरोपी पारस सोम के वकील बलराम सोम और विक्रांत गोस्वामी ने बताया कि पारस और युवती पिछले ढाई से तीन साल से एक-दूसरे के संपर्क में थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। वकीलों के मुताबिक पारस का दावा है कि उसने युवती का अपहरण नहीं किया बल्कि वे दोनों अपनी मर्जी से साथ गए थे। पारस ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वह पिछले दो दिनों से सोया नहीं है और मानसिक दबाव में है।
दलित महिला की मौत को लेकर पारस का कहना है कि छीना-झपटी के दौरान गलती से धारदार हथियार, जिसे स्थानीय भाषा में बनकटी कहा जाता है, महिला को लग गई थी और उसी चोट की वजह से उसकी मौत हुई। वकीलों का दावा है कि यह घटना जानबूझकर नहीं बल्कि अचानक हुई छीना-झपटी के दौरान हुई थी।
वहीं विक्रांत गोस्वामी ने बताया कि युवती को दूसरे कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसने कथित तौर पर बयान दिया कि वह दो-तीन साल से पारस के संपर्क में थी और उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया गया। वकील का कहना है कि युवती ने भी यही कहा कि छीना-झपटी के दौरान ही उसकी मां को धारदार हथियार लग गया था।
इस बीच मेरठ एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि 8 जनवरी को घटना के बाद पुलिस ने 60 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सकुशल बरामद कर लिया। इसके लिए 10 से अधिक पुलिस टीमें बनाई गई थीं, जिन्होंने चार राज्यों के सात जनपदों में दबिश दी। पुलिस ने मैनुअल मुखबिरी, तकनीकी सर्विलांस और इंटेलिजेंस इनपुट के जरिए दोनों को ट्रैक किया।
एसएसपी ने बताया कि युवती का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसके कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए गए हैं। आरोपी पारस सोम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। परिजनों द्वारा लगाए गए रेप के आरोपों पर एसएसपी ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट में युवती के बयान के आधार पर ही आगे की धाराएं तय की जाएंगी। पुलिस सभी साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जुटा रही है ताकि मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
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